Tuesday, November 1, 2011

लिखते रहे हम औरों की कहानी

लिखते रहे हम औरों की कहानी ,
अपनी कहानी हमसे लिखी नहीं गई
लिखनी भी चाही यदि अपनी कहानी ,
तो सफ़ेद स्याही से लिखी ,
जो हमारे सिवा किसी ओर से पढी नहीं गई
लिखते रहे हम औरों की कहानी ,,,,,,

सोचा था समा लेंगे सबके आंसू ,
दिल के दरिया में
परन्तु आंसूयों का बहा ऐसा समुन्दर ,
कि अपनी नैय्या भी हमसे किनारे लगाईं नहीं गई
लिखते रहे हम औरों की कहानी ,,,,,,,,,,,,

परेशानियां कुछ ख़ास नहीं थी जीवन में ,
परन्तु हमने ओढी चिंतायों की ऐसी मोटी चादर ,
कि खुली हवा मैं हमसे श्वास ली नहीं गई
लिखते रहे हम औरों की कहानी ,,,,

जीने की कला कुछ कठिन तो नहीं थी ,
परुन्तु हम यह कला सीखी नहीं गई
लिखते रहे हम औरों की कहानी ,,,

लाखों करोड़ों सपनों से ,
शुरू की थी हमने जिन्दगी
परन्तु जीवन हुआ वो बेहिसाब ,
एक पाई भी हमसे गिनी नहीं गई
लिखते रहे हम औरों की कहानी ,,,,,

कितने ही काम अधूरे पड़े हैं जीवन में ,
अधूरी कहानियों को मिलाकर ,
एक पूरी कहानी बनाती नहीं
लिखते रहे हम औरों की कहानी ,,,,

रेनू राजवंशी गुप्ता
renurajvanshigupta@gmail.com

Sunday, June 19, 2011

नारी पहचान

नारी पहचान

यदि तुम हो शक्ति- दुर्गा भवानी ,
अपनी शक्ति की पहचान करो |

यदि तुम हो लक्ष्मी -सरस्वति -पार्वती,
अपनी शक्ति का संधान करो |

ठहरा पानी ....बरसाती नदी ....या हो गंगा की धारा ......
क्या हो तुम ?
अपनी सही पहचान करो ,
अपना मार्ग स्वयं प्रशस्त करो ||

पहले तुम थीं ठहरा पानी ,,,,,,,
अपनी ही धुरी पर स्थिर ,
ठहरे पानी में दल दल धंसती ,
ना बहती ,,,ना लहलहाती ,
चुप मौन सब सह जाती ,
अपने ही पानी में समा जाती |
कैसे आतीं ,,,,कैसे रहतीं ?
कैसे जीतीं ,,,कैसे मरतीं ?
क्या सोचती ,,,क्या देखती ?
क्या खोती,,,,,क्या पाती ?
दुनिया यह नहीं जान पाती ,
काल की गति में खो जातीं ,
अपनी सही पहचान ना बना पातीं |

जब से बनी हो तुम बरसाती नदी ,,,
अपना ही घर तोड़ने में लगी हो ,
आवेग में परिवार - समाज उखाड़ने में लगी हो ,
ना है तुम्हें किनारों का भान ,
ना है अपनी मर्यादा का मान ,
अपने मद में सबको निगलने चली हो |
मुक्ति के मोह में ,
अपनी गहराई गवां दी |
स्वार्थ के आवेश में ,
किनारों की चौड़ाई मिटा दी |
तुम क्या प्यास बुझाओगी किसी की ,
बरसाती नदी का मैला पानी ,
तुम तो स्वयं घट घट प्यासी घूम रही हो |
झूठी पहचान ओढ़ रही हो ,
सही पहचान खो रही हो |

भागीरथी - जान्हवी ,,,,,तुम बनो गंगा की धारा,
तुम रहो इतनी गहरी कि ,
पत्थर भी तैरने लगें |
तुम बनो इतनी चौड़ी कि ,
पाट पाट को निहारने लगे |
तुम बनो इतनी पावन कि ,
नदी नाले तुममें मिलकर गंगा जल बनने लगें |

तुम रहो अनुशासित अपना कूल ना तोड़ो ,
तुम रहो मर्यादित अपना घर ना छोड़ो ,
तुम तो हो प्राणदायिनी ,
अपनी सही पहचान स्वयं बनों |

ना बनो तुम ठहरा पानी ,
ना बनो तुम बरसाती नदी ,
जान्हवी - भागीरथी ,
तुम गंगा की धार बनो
अपना मान सम्मान बनो ,
अपनी सही पहचान बनो |

यदि तुम हो शक्ति -दुर्गा भवानी ,
अपनी शक्ति की पहचान करो |
यदि तुम हो लक्ष्मी सरस्वति -पार्वती,
अपनी शक्ति का संधान करो ||

रेनू राजवंशी गुप्ता
nishved@yahoo .com
USA

Friday, June 10, 2011

प्रवासी (N . R . I ) भारतीय अनुयायिओं की ओर से परम पूजनीय बाबा रामदेव जी से अनशन समाप्त करने की विनम्र प्रार्थना

प्रवासी (N . R . I ) भारतीय अनुयायिओं की ओर से परम पूजनीय बाबा रामदेव जी से अनशन समाप्त करने की विनम्र प्रार्थना

आज भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व बाबा रामदेव एवं उनके अनुयायों के साथ हुए अमानवीय अत्याचारों का साक्षी रहा है | ४ जून को हुए बर्बर आक्रमण ने अत्याचार की सभी सीमाएं तोड़ दी हैं | इस अन्याय की पर्तिध्वानी भारत से बाहर विश्वभर में सुनाई दे रही हैं एवं हम सभी प्रवासी भारतीय इससे विचलित एवं आहत हैं |
हमारा देश ऋषि मुनियों का देश रहा है , साधू संतों का देश रहा है | इस ऋषि परम्परा के कारण ही भारत विश्व में धर्म गुरु बनाने का अधिकारी है , भारत में आदि काल से आध्यात्म की खोज में अन्य देशों से जिज्ञासु आते रहे हैं एवं आते रहेंगे | आत्म साक्षात्कार के पश्चात ऋषि जगत के कल्याण के लिए अपना जीवन होम कर देते हैं | कमल के सामान ये समाज में रहते हुए भी समाज से अलिप्त रहते हैं, परन्तु समाज के निरंतर समाज के कल्याण एवं प्राणी मात्र के उत्थान के लिए संघर्ष करते रहते हैं | पूजनीय स्वामी जी ने आज भारत के उत्थान एवं कल्याण के लिए भ्रष्टाचार मिटाने एवं काले धन को बाहर निकलवाने का अति साहसी अभियान आरम्भ किया है | हम सब आपके साथ इस सत्याग्रह के लिए तत्पर हैं |
परन्तु आपको अनशन पर बैठा देख हम प्रवासी भारतीयों का ह्रदय आर्तनाद करता है | आपका जीवन भारत के प्रत्येक व्यक्ति के लिए अति मूल्यवान है | आज कोई ऐसा घर नहीं है जहाँ बाबा रामदेव के योग ज्ञान से , उनकी दवाईओं से लोगों को लाभ ना हुआ है | योग, आरोग्य के साथ साथ राष्ट्रीय चरित्र का वरदान हमें आप से ही मिला है | हम किसी भी प्रकार आपके जीवन को संकट मैं नहीं देख सकते हैं | योग का सही ज्ञान एवं उच्च जीवन मूल्यों के प्रतिस्थापन के लिए आपका मार्गदर्शन हम सबके लिए अनिवार्य है | इसके अतिरिक्त कांग्रेस सरकार एवं उसके उच्चासीन निरंकुश नेताओं के मन मैं ना तो भारत एवं भारतीयता के प्रति आदर है | और ना ही देश से प्रेम है एवं ना ही ऋषि परम्परा के प्रति सम्मान है | ऐसी तानाशाही सरकार के लिए हमें जान नहीं देनी है , वरन उनसे अपने अधिकारों एवं देश के सम्मान के लिए युद्ध करना है और लड़ने के लिए हमें आपका नेतृत्व चाहिए | हम सब प्रवासी भारतीय आपसे प्रार्थना करते हैं कि आप अपना अनशन तुरंत समाप्त करे एवं सत्याग्रह को पूरे जोर से जारी रखें | हम सब अपना तन मन धन देने के लिए तत्पर हैं |

सेवा में |
रेनू गुप्ता
अरुण गुप्ता
६०७० Eaglet डॉ
west chester , OH ४५०६९
USA

दिल्ली पर नजर रखने वालों पिंडी को संभालो तो जानो

१९६५ के भारत पाकिस्तान युद्ध के समय यह गीत साप्ताहिक हिंदुस्तान में प्रकाशित हुआ था |
पाकिस्तान का सच १९६५ में एवं २०११ में एक ही है


कुछ लोग सुना है दिल्ली में आने की तमन्ना करते हैं ,
कुछ चूहे मिलकर बिल्ली को खाने की तमन्ना करते हैं |
दिल्ली पर नजर रखने वालों पिंडी को संभालो तो जानो ,
लाहौर की हद से एक कदम भी आगे बढ़ा लो तो जानो |
सेबरजेट पर आने वालों क्या जोर हमारा देख लिया ,
सरगोधा और चकलाला पर नेटों का नजारा देख लिया |
दावा है अयूब भुट्टो का वो लड़ेंगे एक हजार वर्ष ,
डालर के सहारे जी लेंगे एक दो नहीं तो चार वर्ष |
गले में जो हड्डी अटकी है उसको निकालो तो जाने ,
दिल्ली पर नजर रखने वालों पिंडी को संभालो तो जानो ||
मुल्तान की गर्मी खा खाकर कश्मीर की हसरत करते हैं ,
कश्मीर के गम में ये बेचारे ना जीते हैं ना मरते हें |
कश्मीर का हर मुस्लिम बच्चा भारत का राज दुलारा है ,
हर जाति का हर महजब का ये हिंदुस्तान हमारा है |
तुम मुस्लिम के सिवा किसी गैर को सीने से लगा लो तो जानो |
दिल्ली पर नजर रखने वालों पिंडी को संभालो तो जानो ||
तुम गेहूं की रोटी खाते हो वही रोटी हम भी खाते हैं ,
फिर हम दोनों में क्या फर्क है यह आज तुम्हें बतलाते हैं |
कल तक हम दोनों एक ही थे मगर यह बात तुम भूल गए ,
गैरों ने पिला दी कुछ ऐसी तुम झूठे नशे में भूल गए |
हम खड़े हैं अपने पावों पर तुम गैरों के कंधे चढ़ते हो ,
नफरत है पड़ोसी से बेगानों के पाँव पड़ते हो |
आँखों से विदेशी परदे को दो रोज हटा लो तो जानो ,
दिल्ली पर नजर रखने वालों पिंडी को संभालो तो जानो ||


प्रस्तुति
रेनू राजवंशी गुप्ता

Wednesday, May 11, 2011

यमुना बचाओ आन्दोलन




यमुना बचाओ आन्दोलन
यमुना नदी की हिन्दू जीवन में क्या महत्व है , भक्त के मन में क्या सार्थकता है , यह सब हम अच्छी तरह जानते है |
यमुना नदी के बिना ना तो हम बृज की कल्पना कर सकते हैं ना ही कृष्ण लीला का रसास्वादन कर सकते हैं |
कालिया दहन , चीर हरण , रास लीला, माँ यशोदा द्वारा ब्रहमांड दर्शन , बाल गोपाल की क्रीडा लीला आदि अनेकानेक लीलाएँ यमुना जी के तीर पर हुई हैं | आज भी भक्तजन वेणु कि मधुर ध्वनी यमुना तट पर सुनते हैं , कदम्ब के वृक्ष के पता लताओं के रूप में अनेक ऋषि संत यमुना तट पर बृज में वास करते हैं |

हमारे शास्त्रों मैं यमुना नदी का अनंत महात्म्य है | श्रीमद भागवत महापुराण में यमुना जी को साक्षात् भगवती स्वरूप माना गया है | यमुना जी सूरज की पुत्री हैं , यमराज कि बहिन यमी हैं एवं कालिंद पर्वत कि बहिन होने के नाते कालिंदी कहलाती हैं | यमुना जी कृष्ण प्रेम का प्रतीक हैं | गंगा जी यदि मानव के मोक्ष एवं निर्वाण का प्रतीक हैं तो यमुना जी अथाह प्रेम एवं स्नेह का प्रतीक हैं | यही प्रेम मानव को मृत्यु से भी मुक्ति दिलवा सकता है |

भोगोलिक दृष्टि से यमुना जी का उद्गम स्थल समुद्री तल से ६३८७ मीटर कि ऊंचाई पर , उत्तराँचल प्रदेश की देवभूमि का पावन स्थल यमुनोत्री है | यमुनोत्री से प्रयाग (संगम ) तक की ८५५ मील (१३७६ किलोमीटर ) कि यात्रा यमुना जी मुख्यत उत्तराँचल , उत्तर प्रदेश, हिरयाणा एवं दिल्ली प्रदेश से होकर करती हैं | यमुना जी का जल तीन लाख पेंतालीस हजार किलोमीटर कि भूमि को सींचित करता है | ये पावन, स्वच्छ यमुना जी उत्तरप्रदेश की भूमि तक तो मैला रहित रहती हैं , यानी यमुनोत्री से हथिनी कुण्ड बैराज तक तो यमुना जी का जल स्वच्छ रहता है | परन्तु मथुरा तक पहुंचते सब प्राणियों को जीवन दान करने वाली , प्रेम देने वाली इस नदी को मृत नदी घोषित कर दिया जाता है | वैसे तो ओधोगिक क्षेत्र से गुजरते हुए वहाँ का प्रदुषण यमुना जी अपने भीतर वहन ही नहीं करती हैं , सहन भी करती हैं , परन्तु दिल्ली प्रदेश में प्रवेश करते ही यह नदी मैले के अतिरिक्त और कुछ नहीं रह जाती है | यमुना जी की वजीराबाद बैराज से ओखला बैराज तक की यात्रा मात्र ५७ किलोमीटर तक कि होती है , इस दौरान यमुना जी का केवल २% पानी ही प्रवाहित होता है , परन्तु दिल्ली प्रदेश में प्रतिदिन ३२६७ मिलियन लीटर मैला यमुना जी में प्रतिदिन प्रवाहित है | बृज भूमि पहुंचाते यह नदी दुर्गन्धपूर्ण कीचड़ बनकर रह जाती है | इस पावनी नदी यमुना जी की दुर्दशा देखकर किस भक्त का ह्रदय नहीं काँपेगा ?

यमुना जी के जल को स्वच्छ बनाये रखना कोई दुष्कर कार्य नहीं है , इसके तीन सरल उपाए हैं -
१) हथिनी कुण्ड बैराज से यमुना जी में अधिक जल छोड़ा जाए |
२) दिल्ली प्रदेश में यमुना जी में मैला डालने के कुचक्र को नियंत्रत किया जाए | इसके लिए यमुना जी के साथ साथ पाइप लगाकर मैले कि दिशा को मोड़ा जा सकता है या drainage बनाये जा सकते हैं |
३) प्रतिवर्ष मई से लेकर नवम्बर माह में यमुना जी का जल बेरोक टोक बहाया जाना चाहिए | इस समय बहुधा नदी में पानी कम ही रहता है |
यदि आप यमुना नदी के जल को स्वच्छ रखने का स्थाई हल खोज रहे हैं तो एक स्वतन्त्र संस्था का संगठन करें जो सरकार के दिन प्रतिदिन के हस्तक्षेप के बिना शोध एवं कार्य करेगी | यह संस्था सीधे लोकसभा में अपने कार्य के विकास की सूचना दे | सरकार इस पर्यावरण बचाओ संस्था के लिए एक निश्चित राशि दे | यमुना जी की तरह अन्य नदियों कि भी सफाई का अभियान भी आरम्भ किया जा सकता है |
वर्ष १९७४ से अनेक सरकारी योजनांएं बनती बिगड़ती रही हैं ,परन्तु परिणाम कुछ भी नहीं रहा है | सर्वोच्च न्यायलय ने ८ मई तक सरकार से यमुना उद्धार कि रिपोर्ट मांगी है | सरकार द्वारा दिल्ली के २२ किलोमीटर हिस्से की यमुना नदी की सफाई के लिए पिछले दशक में १५०० करोड़ रूपए व्यय हो चुके हैं , परन्तु सारा धन कहाँ गया है ? क्योंकि यमुना में गंदगी बढ़ती जा रही है |

मान मंदिर से सेवा संस्थान ने पूजनीय रमेश बाबा जी के दैविक नेतृत्व में १ मार्च से १५ अप्रैल तक " यमुना बचाओ आन्दोलन " का शुभारम्भ किया है | प्रयाग से दिल्ली तक यमुना भक्तों ने यात्रा की एवं दिल्ली में जंतर मंतर में एक लाख पचास हजार से भी अधिक संख्या में एकत्रित होकर अपना मत सरकार के सामने रखा | इस आन्दोलन में भारतीय किसान संघ की अहम् भूमिका रही है | इस आन्दोलन में मानमंदिर के भक्तों एवं गोपिओं की विशेष भूमिका निभाई | सरकार की प्रतिनिधि श्रीमती बहुगुणा जी बृज भक्तों एवं भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष से मिली एवं सबको आश्वासन दिया कि हथिनी कुण्ड बेराज से अधिक मात्र में जल यमुना जी में छोड़ा जाएगा | यात्रा तो अभी पूर्ण हुई है परन्तु संघर्ष जारी है |

बृज की गली गली में घूम घूम कर यमुना बचाओ आन्दोलन के विषय में भजन संकीर्तन द्वारा चेतना जाग्रत की जा रही है | आप भी इस आन्दोलन में सहयोग देकर एक यजमान बन सकते हैं | कृपया साथ में दी गई petition पर हस्ताक्षर करें |

अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति अमेरिका का १५ वां अधिवेशन





















अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति अमेरिका का १५ वां अधिवेशन

अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति अमेरिका का १५ वां अधिवेशन धूमधाम से cleveland (ओहाओ ) में अप्रैल २९, ३० २०११ को संपन्न हुआ |
दो दिन के इस अधिवेशन में १५० से अधिक हिंदी प्रेमी delegates सम्मिलित हुए एवं शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं कवि सम्मलेन में ३०० से अधिक हिंदी प्रेमी सम्मिलित हुए थे | इस अधिवेशन ने अमेरिका कि भूमि पर हिंदी का नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया हें | इस भव्य अधिवेशन में हिंदी प्रेमिओं ने दो दिन तक शानदार भोजन , होटल क़ी सुवय्व्स्था , दो कवि सम्मलेन , हिंदी की यात्रा पर मनोरम नाटक एवं अमेरिका में हिंदी शिक्षण पर ज्ञानवर्धक सत्रों का आनंद उठाया | अधिवेशन में कनाडा , अमेरिका एवं भारत से हिंदी साहित्यकारों ने भाग लिया |

अप्रैल २९ शुक्रवार की शाम को cleveland के ६० बच्चों एवं युवाओं ने हिंदी भाषा क़ी यात्रा जो कि संस्कृत से आरम्भ होकर पाली , प्राक्रत, बृजभाषा , अवधि एवं खड़ीबोली तक जाती हें एवं तुलसी सूर से लेकर छायावादी काव्य से गुजरती हुई आधुनिक साहित्य तक पहुंचती हें | दर्शकों ने हिंदी के प्रसिद्ध कविओं कि छवि भी देखी, तो उनकी कविताओं कि झलक का भी आनद लिया | कलाकारों ने हिंदी कि यात्रा एक नृत्य नाटिका के माधय्म से प्रस्तुत कि थी | यह कार्यक्रम सब हिंदी प्रेमिओं को अचंभित एवं गर्वोन्नत करने वाला अनुभव था क्योंकि यह कार्यक्रम अमेरिका में जन्मे एवं पले बच्चों ने किया था |स्वादिष्ट भोजन के पश्चात् अमेरिका के १५ कविओं ने काव्य पाठ किया जो कि दो घंटे तक चला |

शनिवार क़ी प्रातः स्वागत समारोह के साथ अधिवेशन का शुभारम्भ हुआ अधिवेशन के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष , राजनयिक एवं कवि डा केशरी नाथ त्रिपाठी जी भारत से पधारे थे | उनके संभाषण एवं कविताओं का सबने खूब आनंद लिया |कुछ पुस्तकों के विमोचन के पश्चात् अमेरिका में हिंदी शिक्षण विषय पर विभिन्न सत्र आयोजित किये गए जिनमें दस से अधिक विद्वानों ने अपने आलेख प्रस्तुत किये जिनमें कुछ प्रमुख थे , खेल खेल में हिंदी सिखाना , हिंदी बोलने के लिए कुछ वयव्हारिक सुझाव, वैश्विक स्तर पर हिंदी के भविष्य एवं अमरीकी सरकार द्वारा उपलब्ध अनुदान एवं हिंदी शिक्षण के कार्यक्रमों का विवरण |
सायंकाल भारत से आये तीन अतिथि कविओं डा सर्वेश अस्थाना एवं प्रवीण शुक्ल ने हास्य व्यंग्य एवं डा विष्णु सक्सेना जी ने मधुर गीतों से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया | स्तरीय कविता पाठ से सभी श्रोता अभिभूत हो गये |

अधिवेशन में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति ने तीन प्रस्ताव सर्व सममिति से पारित किये गए , जिन पर बड़ी संख्या में हस्ताक्षर किये गए | ये प्रस्ताव भारत सरकार , मीडिया एवं सबंधित संगठनों को भेजे जायेगा | ये प्रस्ताव हैं ,,,
१) भारत सरकार द्वारा हिंदी को राजभाषा का स्थान दिलवाने का आग्रह
२) अमेरिका में हिंदी प्रशिक्षण का प्रसार
३) अमेरिका कि युवा पीढी में हिंदी के प्रति प्रेम जाग्रत करना
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति कि स्थापना ३० वर्ष पूर्व वाशिंगटन डी सी में हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार कुंवर चन्द्र प्रकाश सिंह जी ने की थी | जिसके विकास में डा रवि प्रकाश सिंह जी ने पूर्ण समर्पण से अथक प्रयास किया | यह अमेरिका की सबसे अधिक स्थाई एवं प्रसारित संस्था हें | जिसने अमेरिका में हिंदी के मान सम्मान एवं स्थापना के लिए अनेक सार्थक प्रयास किये हैं | कवि सम्मेलन का आयोजन, विश्वा का प्रकाशन , हिंदी समिति की अनेक नगरों में शाखाएँ स्थापित करवाना , अनेक नगरों में गोष्ठियां आयोजित करना एवं अधिवेशनों का आयोजन करना हिंदी समिति की मुख्य गतिविधि हैं |

cleveland की शाखा हिंदी समिति की सबसे अधिक क्रियाशील शाखा है | वर्तमान अध्यक्ष श्री गुलाब खंडेलवाल जी , आगामी अध्यक्ष श्रीमती सुशीला मोहनका जी , उनका समस्त परिवार , श्री अनूप कपूर जी (अधिवेशन के संयोजक ) एवं उनके समस्त दल ने अधिवेशन की तय्यारी , सञ्चालन बहुत कुशलता एवं सतर्कता से किया |
अधिवेशन के बीस दिन पूर्व हिंदी समिति के प्रणेता एवं अधिवेशन के मुख्य संयोजक डा महादेव चंद जी के आकस्मिक देहांत से हिंदी समिति परिवार को अपूरणीय क्षति हुई | परन्तु उनके परिवार विशेषकर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मोहनका जी ने समिति के सभी सदस्यों के सहयोग से एवं जिस साहस से इस अधिवेशन का आयोजन किया एवं इसे एक भव्य समारोह का रूप दिया एवं समिति में एक प्रेरणा , एक उदहारण बन गया है | यह सम्पूर्ण अधिवेशन डा महादेव चंद जी को समर्पित किया गया है |

प्रस्तुति :
रेनू राजवंशी गुप्ता
cincinnati , USA

Friday, December 24, 2010

वो दिन हें याद मुझे

यह दो कविताये एक शीर्षक से अलग अलग वर्षों में लिखी थी | जीवन कि यात्रा में यह परिवर्तन रोचक लगा |


वो दिन हें याद मुझे (वर्ष १९९०)
वो दिन हें याद मुझे जब आँखों में पानी बहता था ,
पानी कि लहरों में कुछ सपने डोला करते थे |
वो दिन हें याद मुझे ,,,,,
जब ताज़ी रची मेहँदी कि गर्मी से हथेली पसीजा करती थीं ,
हथेली में डूबी प्रियतम कि आँखे बहका करती थीं |
वो दिन हें याद मुझे ,,,,,,,
जब साथ साथ चलते कदम सहज लयबद्ध हो जाया करते थे ,
अंगुलिओं के सायास संघर्षण से तन मन विद्युतमय हो जाया करते थे |
वो दिन हें याद मुझे ,,,,,,
जब बिन प्रश्न किये हम सब कुछ सोंप दिया करते थे ,
विश्वास कि कलम से उत्तर ही उत्तर लिख दिया करते थे |
वो दिन हें याद मुझे ,,,,,,,
जब कहने को कुछ नहीं रहता तो मौन मुखरित हो जाता था ,
गूंगा मन कैसे बातें करता समझ नहीं पाते थे |
वो दिन हें याद मुझे ,,,,,,,,
वो दिन हें याद मुझे जब आँखों में पानी बहता था ,
पानी कि लहरों में कुछ सपने डोला करते थे |


वो दिन है याद मुझे (वर्ष २०१०)
जब हम ईश्वर कि चर्चा करते थे ,
एवं इंसानों को प्यार करते थे |
परन्तु अब हम ,,,,
इंसानों कि चर्चा करते हैं ,
एवं अपने अहम् से प्यार करते हैं |
वो दिन हैं याद मुझे ,,,,,,
जब हम घर में रहा करते थे ,
एवं घर के लोगों से प्यार किया करते थे |
परन्तु अब हम,,,,
घर के लोगों के साथ रहते हैं ,
एवं घर के सामान से प्यार किया करते हैं |
वो दिन हें याद मुझे ,,,,,
जब हम घर के बाहर खेल रहे बच्चों को लड्डू मठरी बनता करते थे ,
परन्तु अब हम ,,,,
अपने बेटे को अकेले कमरे में बैठा कर चोकलेट केक खिलाया करते हैं |
वो दिन हें याद मुझे ,,,,
जब हम बेरोक टोक परायों से बाते किया करते थे ,
एवं घर कि मुंडेर पर पड़ोसियों के सुख दुःख बांटा करते थे |
परन्तु अब हम,,,,
फ़ोन पर टैक्स मेसेज भेज दिया करते हैं ,
एवं टीवी सीरियल द्वारा सास बहु के झगड़े निबटाया करते हैं |
वो दिन हें याद मुझे ,,,,,,,
जब हम बेटे कि शादी का न्योता देने घर घर जाया करते थे ,
बेटी कि शादी में बिना कुछ खाए पिए साथ बंटाया करते थे |
परन्तु अब हम,,,,
शादी का निमंत्रण ईमेल से भेज दिया करते हैं ,
एवं बारात के आने से पहले ही खाना खाकर घर चले जाते हैं |
वो दिन हैं याद मुझे ||


रेनू राजवंशी गुप्ता
cincinnati , ohio
nishved @ yahoo .com